आपण जे करतो, वागतो, बोलतो तेच फिरून आपल्याला मिळते. प्रत्येकाने आपल्याला शक्य असेल तेवढेच किंबहुना, त्याहून थोडेसे कमी जर इतरांसाठी केले तर बरेच प्रश्न सुटतील. हा व्हीडीओ जरूर पहा.
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हमको अब तक आशिकी का वोह ज़माना याद है चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है
खींच ले ना वोह मेरा परदे का कोना दफ्फतन
और दुपट्टे से तेरा वोह मुंह छुपाना याद है
हमको अब तक आशिकी का वोह ज़माना याद है
चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है
दो पहर की धुप में मेरे बुलाने के लिए
वोह तेरे कोठे पे नंगे पॉँव आना याद है हमको अब तक आशिकी का वोह ज़माना याद है चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है
बेरुखी के साथ सुनना दर्द ए दिल की दास्तान
वोह कलाई में तेरा कंगन घुमाना याद है हमको अब तक आशिकी का वोह ज़माना याद है चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है
वक्ते रुकसत अलविदा का लफ्ज़ कहने के लिए
वोह तेरे सूखे लबों का थर थराना याद है
हमको अब तक आशिकी का वोह ज़माना याद है चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है आगया अगर वस्ल की शबभी कही ज़िक्रे फिराक